18.5.08


शिकवे गीले कोई करना नहीं
आना मेरे यार वरना नहीं

बीगडे नियत आइनेकी कभी
इतना भी सजना संवरना नहीं

खंजर छुपे हें हंसी ओढके
धोखेमें कोईभी रहेना नहीं

ठोकर लगे यादकी हर क़दम
ऐसी गलीसे गुझरना नहीं

ढोके ये दुनिया, झुकी है कमर
खुदा, तुं इबादत समझना नही

1 comment:

Jivankala Foundation said...

I made a visit of ur lovely blog.
Its really touchy ! U have prooved that photograps are also a silent poem ! We 'll defenately meet through I-net & Blogs ! Again Congrats for a nice blog.