19.6.10

तडपुं में उनकी यादमें ईतना की ए खुदा
शायद तुम्हे ही भुलना हो्गा मुझे खुदा

दस्तक में दे रहा हुं कीसी और की गली
लगता है कोई गैरमें अपना मीले खुदा

युं चोट खा के जी रहा बहेतर सी जीदगी
मरहम को खामखा भला तकलीफ दे खुदा

चंदासे पुछलो या सितारों से पुछ लो
रातों की रात करवटें बदला कीये खुदा

शम्मा कसम, की हम भी कुछ कम ही जले नहीं
परवाने काश ईसलिये पहेचानतें खुदा

1 comment:

Maria Mcclain said...

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