28.9.10

मेरे सायेको मेरे साथही रहेना होगा
जो भी उसने ना कीया हो ईसे सहेना होगा
ग़म हो या हो खुशी, पलकोंका सहारा ना था
आंसुओ, आंखसे बेबस हुए बहेना होगा
तुं भरोसा न कर अपनी ही ज़ुबांका अक़सर
जो भी कहेना हे वो अंदाझसे कहेना होगा
ना तुझे चुडीयां, हिरेकी अंगुठी दुंगा
मेरे किस्से मेरी यादें तेरा गहेना होगा
ये क़फन ओढके कीतनी है खुशी मत पुछो
आज कुछ ढंगका हमने कभी पहेना होगा

1 comment:

Udan Tashtari said...

बहुत खूब!